प्रातःकाल भक्ति का समय माना गया है प्रातः नित्य भक्ति सुमिरन से प्रभु प्रसंचित होते हैं और भक्तों द्वारा किए गए सारे मनोकामनाएं पूर्ण होते हैं और दिन भर का सारे कार्य प्रभु किर्पा से सफल होते हैं ठीक इसी तरह के भक्ति करते हुए गिरहस्त आश्रम का पालन करते हुए श्री भक्त राजकुमार जी द्वारा नित्य बाबा भोलेशंकर जी की चरण बंदना करते हुए श्री कांत पांडेय के समझ पूजा स्तुति चित्रण देखा जा रहा है